All works copyright of Ankita Chauhan
Please note that work here belongs to Ankita Chauhan and may not be reproduced anywhere without her prior permission.
Comments and Criticism is welcome to the posts published on the blog. Please leave your valuable comments here and if you have a blog yourself, please leave a link to that as well, I will be glad to read works of fellow writers. Thanks

शुक्रवार, 3 अगस्त 2012

सफर


रुकी हैं मंजिलें ,
चल रहा है सफर ,
जिंदगी के जूनून में खो जाने को,
बेताब हो रही है सहर
बैठा है आंखों की गहराई में,
छिपकर अँधेरा,
परदों से निकलकर साँस लेने को,
तड़प रहा है सच का कहर।
दबी है कफ़न के भीतर,
करवटें लेती आरजू ,
जिलाने वास्ते उसको ,
हटाकर बेहया मिट्टी पल रही है उछ्रन्खल लहर।
गुज़र रहा है रास्ता ,
वीराने जंगलों से निकलकर ,
सूखे दरख्तों के तले बेबस हो ,
छाया खोज रही है दोपहर
गिर रहे हैं गश खाकर,
परिंदों के हौसले ,
अनजान थे जो फलसफों से,
कि मीठे झरने आजकल उगल रहे हैं ज़हर।
पढ़े हैं किताबों में,
सच की मिल्कियत के अनगिनत किस्से,
नादान थे हम भी जो खोज में उनकी,
बदल रहे हैं तबसे शहर दर शहर....

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें